है जिंदगी का ये सफर,
कुछ कहे-अनकहे से पल।
कुछ राहें हैं अनजानी,
कुछ मंजिलें अभी बाकी हैं पानी।
तोड़ के कदमों की बेड़ियां,
छोड़ के ये गांव डगरियाँ,
चल पड़े अनजान डगर पे,
एक नए सफर की ओर!!!
कुछ कहे-अनकहे से पल।
कुछ राहें हैं अनजानी,
कुछ मंजिलें अभी बाकी हैं पानी।
तोड़ के कदमों की बेड़ियां,
छोड़ के ये गांव डगरियाँ,
चल पड़े अनजान डगर पे,
एक नए सफर की ओर!!!
Likhte raho, kya pta aage kahi poet ban gayi
ReplyDeleteThank you so much... Hope so 🙂
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