एक आग का दरिया,
एक बहता पानी,
और एक पूर्वा सुहानी।
एक कोयल-सी मीठी,
एक जल-सी शीतल,
और एक वेग-सी चंचल।
एक की आंखों में नदियां,
एक की नाक पे गुस्सा,
और एक की मुस्कान बेजुबानी।
एक ऊंची जैसे पर्वत,
एक दृढ़ जैसे पत्थर,
और एक बेपरवाह सितारा।
अलग है सबकी जिंदगानियां,
अलग है सबकी कहानियां,
फिर भी बेमिसाल है इनकी यारियां।।
एक बहता पानी,
और एक पूर्वा सुहानी।
एक कोयल-सी मीठी,
एक जल-सी शीतल,
और एक वेग-सी चंचल।
एक की आंखों में नदियां,
एक की नाक पे गुस्सा,
और एक की मुस्कान बेजुबानी।
एक ऊंची जैसे पर्वत,
एक दृढ़ जैसे पत्थर,
और एक बेपरवाह सितारा।
अलग है सबकी जिंदगानियां,
अलग है सबकी कहानियां,
फिर भी बेमिसाल है इनकी यारियां।।

Beautiful As You
ReplyDelete🤗
DeleteDil khush ho Jata hai ye ye poem dkh kr....hm teeno poem ki her line mein Nazar aate h😍
ReplyDeleteBilkul sahi....ye hume hi darshata hai🤗🤗
ReplyDeleteJust one word can explain it ....
ReplyDeleteBeautiful....