तेरी चाहत का किस्सा,
सरे आम करूंगी।
तेरी ही महफ़िल में तुझे...
बदनाम करूंगी।
ये जो शराफत का,
चोला ओढ़ा है तुने।
भरी महफ़िल में...
तुझे बेनकाब करूंगी।
तेरी चाहत का किस्सा...
सरे आम करूंगी।
मेरी चाहत का जो,
तुने इनाम दिया!
छोड़ गैरों के बीच,
मुझे बदनाम किया।
तेरे फरेब का तुझे,
सलाम करूंगी।
तेरी ही महफ़िल में...
तुझे बदनाम करूंगी।
तेरी चाहत का किस्सा,
सरे आम करूंगी।।
सरे आम करूंगी।
तेरी ही महफ़िल में तुझे...
बदनाम करूंगी।
ये जो शराफत का,
चोला ओढ़ा है तुने।
भरी महफ़िल में...
तुझे बेनकाब करूंगी।
तेरी चाहत का किस्सा...
सरे आम करूंगी।
मेरी चाहत का जो,
तुने इनाम दिया!
छोड़ गैरों के बीच,
मुझे बदनाम किया।
तेरे फरेब का तुझे,
सलाम करूंगी।
तेरी ही महफ़िल में...
तुझे बदनाम करूंगी।
तेरी चाहत का किस्सा,
सरे आम करूंगी।।

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