ज़िन्दगी तू कहां खो गई!
संग चलते चलते जैसे,
राहें हो मुड़ गई।
ज़िन्दगी तू कहां खो गई!
अब ना किसी के चेहरे पर,
है मुस्कान बिखरती।
नाहिं किसी की बातों से,
है मिठास छलकती।
ज़िन्दगी ना जाने तू,
कहां खो गई है?
तेरे ही खोज में ये जहां,
तुझसे ही दूर हो गई है।
ज़िन्दगी तू कहा खो गई है?
अब ना वो पहले वाली बात है,
नाहिं मिलती अब मेलों की सौगात है।
बचपन की वो हंसी - ठिठौली,
दोस्तों संग वो हमजोली।
ज़िन्दगी तू कहां खो गई!
औरों को संवारते - संवारते,
खुद को ही भूल गई।
ज़िन्दगी तू कहां खो गई!
भागदौड़ भरे इन पलों में,
लोग लम्हें जीना भूल गए।
दूरसंचार के युग में,
अपनों से ही दूर हो गए।
ज़िन्दगी तुझे सुलझाने में,
हम खुद में ही उलझ गए।
तेरी तलाश में ए ज़िन्दगी,
तुझसे ही दूर हो गए।।
संग चलते चलते जैसे,
राहें हो मुड़ गई।
ज़िन्दगी तू कहां खो गई!
अब ना किसी के चेहरे पर,
है मुस्कान बिखरती।
नाहिं किसी की बातों से,
है मिठास छलकती।
ज़िन्दगी ना जाने तू,
कहां खो गई है?
तेरे ही खोज में ये जहां,
तुझसे ही दूर हो गई है।
ज़िन्दगी तू कहा खो गई है?
नाहिं मिलती अब मेलों की सौगात है।
बचपन की वो हंसी - ठिठौली,
दोस्तों संग वो हमजोली।
ज़िन्दगी तू कहां खो गई!
औरों को संवारते - संवारते,
खुद को ही भूल गई।
ज़िन्दगी तू कहां खो गई!
भागदौड़ भरे इन पलों में,
लोग लम्हें जीना भूल गए।
दूरसंचार के युग में,
अपनों से ही दूर हो गए।
ज़िन्दगी तुझे सुलझाने में,
हम खुद में ही उलझ गए।
तेरी तलाश में ए ज़िन्दगी,
तुझसे ही दूर हो गए।।

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