हर कसम से वो यूं मुकर गए,
मौसम की तरह कुछ यूं बदल गए।
जिन्हें अपना बना हम वफ़ा कर बैठें,
उन्हें अपना समझ कुछ सलाह दे बैठें।
उनसे कहा हमने - थोड़ा सुधर जाओ,
वक़्त के साथ थोड़ा संभल जाओ।
ज़िन्दगी है ये...
कमबख्त बार - बार मौका नहीं देती,
थोड़ा तो वक़्त के साथ सवर जाओ।
क्या पता था!
वो वक़्त के साथ...
कुछ यूं संभल जाएंगे!
सबसे पहले हमारे लिए ही...
बदल जायेंगे।।
मौसम की तरह कुछ यूं बदल गए।
जिन्हें अपना बना हम वफ़ा कर बैठें,
उन्हें अपना समझ कुछ सलाह दे बैठें।
उनसे कहा हमने - थोड़ा सुधर जाओ,
वक़्त के साथ थोड़ा संभल जाओ।
ज़िन्दगी है ये...
कमबख्त बार - बार मौका नहीं देती,
थोड़ा तो वक़्त के साथ सवर जाओ।
क्या पता था!
वो वक़्त के साथ...
कुछ यूं संभल जाएंगे!
सबसे पहले हमारे लिए ही...
बदल जायेंगे।।

