21 वीं शताब्दी में भी वो,
90 के दौर की मोहब्बत करता है।
हां मजनुओं सा वो अब भी...
छजे से अक्सर उसको ताड़ता है।
गलियों से आते जाते भी,
रास्ता उसका निहारता है।
पब, थरेटर, माल को छोड़...
घाटों पर संग उसके वक़्त बीतता है।
हां मॉडर्न एज में भी वो...
गली का आशिक कहलाता है।
टाइम पास के जमाने में भी जो,
वही बचपन वाला प्यार निभाता है।
वैसे तो हैं लड़कियां बहुत...
पर उस एक को ही वो चाहता है।
सोशल नेटवर्किंग के दौर में भी जो,
चौराहे पर रोक खत उसको पकड़ता है।
हां मॉडर्न एज में भी वो...
गली का आशिक कहलाता है।
नखरे ना उसके कभी समझता वो,
बस यूंही मुंह फूलाता है।
पर फिर भी उसके मैसेज/कॉल का..
इंतज़ार उसको बड़ा सताता है।
कहता है वो है "पंडिताइन" उसकी,
बेखौफ हक जताता है।
21 वीं शताब्दी में भी वो,
90 के दौर की मोहब्बत निभाता है।