Saturday, October 27, 2018

तुम्हें वो प्यार याद आएंगा...

तुम्हें वो प्यार याद आएंगा,
मेरा इंतजार याद आएंगा।
जब हम ना होंगे साथ...
संग गुजारा हर लम्हा याद आएंगा,
हां तुम्हें वो प्यार याद आएंगा।।

वो हमारी पहली मुलाकात,
वो दशहरे का मेला...
और झूलों का साथ।
तुम्हें वो साथ याद आएंगा,
हां तुम्हें वो प्यार याद आएंगा।।

वो सूरज के साथ मेरा पहला संदेश तुम्हें,
और एक तुम्हारी ही आवाज सुनने की चाह लिए...
मेरा हर एक दिन ढल जाना।
तुम्हें वो हर CALL, हर MESSAGE याद आएंगा,
हां तुम्हें वो प्यार याद आएंगा।।

वो एक बार मिल लेने की दरख़ास मेरी,
और तुम्हारा BUSY हूं कह कर...
मेरी बात टाल जाना।
तुम्हें हर एक REQUEST याद आएंगा,
हां तुम्हें वो प्यार याद आएंगा।।

कुछ और तो ना मांगा तुमसे!!
बस थोड़ा वक्त के सिवाय।
जब भी बैठोगे अकेले में,
तुम्हें वो वक्त याद आएंगा।
मेरा इंतजार याद आएंगा,
हां तुम्हें वो प्यार याद आएंगा...
तुम्हें वो प्यार याद आएंगा।।

Thursday, October 11, 2018

जिंदगी बता तेरा ठिकाना

कभी समझा कि तू सहेली है,
कभी माना कि तू पहेली है।
कभी पाया तुझमें चांद-सी शीतलता,
कभी जाना है तुझमें सूरज-सा तेज भी।।

कभी सीखा हंसना तुझसे,
कभी टूटकर रोई भी।
कभी दिखाया तुने पगडंडी,
कभी मिली राहें अंधेरी भी।।

कभी होती तू मोम-सी कोमल,
कभी तुझमें दिखता एक दृढ़ पर्वत।
कभी तूने हजारों को अपना बनाया,
कभी बनाया अपनों को भी पराया।
कभी तूने मंज़िल बतलाई,
कभी हाथ से फिसली एक जीत भी।।

आखिर तू क्या है जिंदगी...
और क्या है तेरा फ़लसफ़ा।
कैसे कोई पहचाने तुझे,
आखिर क्या है तेरा फ़साना??
 तू ही बता मुझे ऐ जिंदगी,
 तू ही बता अब...
                       तेरा ठिकाना!!!

Tuesday, October 2, 2018

यारियां...!!!

एक आग का दरिया,
एक बहता पानी,
और एक पूर्वा सुहानी।

एक कोयल-सी मीठी,
एक जल-सी शीतल,
और एक वेग-सी चंचल।

एक की आंखों में नदियां,
एक की नाक पे गुस्सा,
और एक की मुस्कान बेजुबानी।

एक ऊंची जैसे पर्वत,
एक दृढ़ जैसे पत्थर,
और एक बेपरवाह सितारा।

अलग है सबकी जिंदगानियां,
अलग है सबकी कहानियां,
फिर भी बेमिसाल है इनकी यारियां।।