Tuesday, November 27, 2018

इश्क़ की महफ़िल में...

इश्क़ की महफ़िल में,
अब कुछ यूं आग लगी है...
आशिकी की नुमाइश है और
रिश्तो पे दांव लगी है।
इश़्क की महफ़िल में,
अब कुछ यूं आग लगी है।


ये तेरी वाली,वो मेरी वाली,
हर ओर ये बात चली है।
सूरत की चाह में,
सीरत पे मार पड़ी है।
इश़्क की महफ़िल में,
अब कुछ यूं आग लगी है।


एक का साथ होकर भी,
दूसरे पे निगाहें गड़ी हैं।
तेरा एक है!मेरे चाहने वाले चार,
बस दिखावे की शोर मची है।
इश़्क की महफ़िल में,
अब कुछ यूं आग लगी है।


सच्चाई हो जिसमें,
ऐसी कोई दिलकशी ना देखी।
मुकम्मल हो जाएं जो,
ऐसी किसी की तकदीर ना देखी।
इश़्क की महफ़िल में,
अब कुछ यूं आग लगी है...
दिल सहमा-सा है और
लबों पे मुस्कान टिकी है।
जितना चाहो लुट लो,
हर ओर ये होड़ मची है।
आशिकी की नुमाइश है और
रिश्तों पे दांव लगी है।
इश़्क की महफ़िल में,
अब कुछ यूं आग लगी है।।

Thursday, November 22, 2018

वो नाराज है

वो मुझसे नाराज है,
वो एक दोस्त जो मेरी खास है।
ना जाने क्या बात है..
कुछ उखड़ी-उखड़ी-सी आज है,
हां वो नाराज है।।

बड़ी मासूम सी वो जान है,
दुनिया की भीड़ से अनजान है।
हां बातों में कोई ना उससे जीत पाया,
एक अलग ही उसका अंदाज है।
नादान-सी,सीधी-साधी,
प्यारी-सी पहचान है।
लबों पे मुस्कान लिए,
दिल की वो सरताज है।

पर वो नाराज है...
वो एक दोस्त जो मेरी खास है।।