Sunday, May 19, 2019

कतरा कतरा

ये जो कतर - कतरा,
तुम मुझे...
मुझसे ही दूर कर रहे हो।

 ना जाने क्यों! मुझे ही...
तुम्हें ना चाहने को मजबुर कर रहे हो।
ये जो तुम मुझे मुझसे ही दूर कर रहे हो।

हर वक़्त खोए रहते हो,
ना जाने क्यों ! मुझसे ही रूठे रहते हो।
मौजूद तो हो जमाने के लिए,
जब बात हो मेरी...
तुम खुद में ही मगरुर हो जाते हो।

ये जो तुम मुझे खुद से दूर कर रहे हो,
क्या खबर है तुम्हें!
मुझे ही मुझसे बेनूर कर रहे हो।

वो एक लड़का है

उन्हें अदा आती है गम छुपाने की,
मुस्कुरा के हर बात टाल जाने की।

नैनों में जिसके समंदर भरा है अश्कों का,
वो अपनी खामोशियों से... सबका दिल बहलाता है।

खुद बिखरा है जो हजारों टुकड़ों में,
सबको वो साथ लेकर चलना सिखलाता है।

दिल जिसका हर पल रिसता है किसी की यादों में,
लब्जों पर मोती सजाएं वो सारे गम बिसराता है।

खुद जिसकी रातें गुजरी है तबाह हो कर,
वो हर सुबह सबको जीना सिखलाता है।

"वो एक लड़का है" जो खुद को भूला,
हर रोज सबके लिए जीता है।