Sunday, May 19, 2019

कतरा कतरा

ये जो कतर - कतरा,
तुम मुझे...
मुझसे ही दूर कर रहे हो।

 ना जाने क्यों! मुझे ही...
तुम्हें ना चाहने को मजबुर कर रहे हो।
ये जो तुम मुझे मुझसे ही दूर कर रहे हो।

हर वक़्त खोए रहते हो,
ना जाने क्यों ! मुझसे ही रूठे रहते हो।
मौजूद तो हो जमाने के लिए,
जब बात हो मेरी...
तुम खुद में ही मगरुर हो जाते हो।

ये जो तुम मुझे खुद से दूर कर रहे हो,
क्या खबर है तुम्हें!
मुझे ही मुझसे बेनूर कर रहे हो।

No comments:

Post a Comment