Monday, December 10, 2018

उसे अब तुम मुकम्मल करना

वो  जो इश्क़ मेरा था...
उसे अब तुम मुकम्मल करना।
वो मेरा ना हो सका तो क्या!
अब तुम ही उसकी बरक्कत बनना।।

छोड़  तो गया  ही था वो मुझे,
अब अपने रास्ते मैं खुद ढू़ढ लूंगी।
पर वो थोड़ा नादान है...
अकेले खुद सभंल ना पाएंगा,
ज़रा तुम उसका हाथ थामें रखना।
वो जो मेरा था,
उसे अब तुम मुकम्मल करना।।

खुद का किनारा तो मैं बन जाऊंगी,
जमाने का हर वार भी सह जाऊंगी।
पर वो बड़ा भावुक है...
अश्कों में बह जाता है।
ज़रा तुम उसकी पतवार बन जाना।
वो जो मेरा था,
उसे अब तुम मुकम्मल करना।।

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